खुशफ़हम इस दिल को, कल रात टटोल के देखा किसी गिरह में भूले ज़ख्म का शरारा छिपा रखा था (खुशफ़हम = credulous, गिरह= knot/joint, शरारा = spark)
थक-हार गया था जंग, जहाँ तूफाँ से लड़ते लड़ते
समंदर ने लहरों के पीछे ही इक किनारा छिपा रखा था
जुगनुओं को तलाशता रहा बेख़बर एक उम्रभर
कमबख़्त ज़िन्दगी ने मुठ्ठी में सितारा छिपा रखा था
अँधेरी रात जो छटती, कभी शायद हमें दिखता
सुबह ने धुंध पार क्या हसीं नज़ारा छिपा रखा था
है नहीं शायद मुमकिन, लफ़्ज़ हर दर्द को देना
मैंने नज़्मों में लेकिन हल्का सा इशारा छिपा रखा था